ऑपरेशन लोट्स: कमल खिलेगा या कीचड़ उछलेगा

   By Power Corridors ,  17-Jan-2019
ऑपरेशन लोट्स: कमल खिलेगा या कीचड़ उछलेगा

कर्नाटक में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने पर भी सरकार बनाने में मिली हार को बीजेपी अब तक नहीं पचा पा रही है.

कर्नाटक में सबसे बड़े दल के रूप में उभरने पर भी सरकार बनाने में मिली हार को बीजेपी अब तक नहीं पचा पा रही है. सात महीने बाद फिर बीएस येदियुरप्पा की कोशिशें रंग लाती नज़र आ रही हैं. दरसल बीजेपी से ज्यादा येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के लिए आतुर हैं। दो निर्दलीय विधायक एच नागेश और आर शंकर के कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद कांग्रेस के तीन विधायक मुंबई पहुंच चुके हैं औऱ  बीजेपी के संपर्क में बताए जा रहे हैं. बीजेपी ने इसे ऑपरेशन लोटस 3.0 नाम दिया है. मज़े की बात ये है कि बीजेपी को भी अपने विधायकों के टूटने का खौफ है लिहाज़ा अपने करीब 90 विधायक दिल्ली के करीब गुड़गांव के होटल आईटीसी ग्रांड्स में बुला कर बिठा लिए गए हैं.

BS Yeddyurappa, BJP: We are not indulging in any poaching. It is CM Kumaraswamy who is indulging in horse-trading, not BJP, CM himself is offering money and ministerial posts. #Karnataka pic.twitter.com/gyYZ76LZpf

— ANI (@ANI) January 17, 2019

कुमारस्वामी भले ही कह रहे हैं कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है लेकिन वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे गुरुवार को पार्टी के विधायकों की बैठक में हिस्सा लेने बैंगलुरु पहुंच रहे हैं. वहीं कांग्रेस के तीन विधायकों को लेने के लिए कर्नाटक कांग्रेस के संकटमोचक डी शिवकुमार मुंबई जा रहे हैं। इसे ऑपरेशन संक्रांति भी कहा जा रहा है तो 19 को 19 का नाम भी दिया गया है. यानि 19 जनवरी तारीख
तक राजनीतिक जोड़तोड़ अपने पक्ष में करने का दावा किया जा रहा है. दरसल पिछले साल कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को 80 सीटें और जनतादल (एस) को 37 सीटें मिलीं थीं औऱ किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था.

राज्यपाल वजूभाईवाला ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीजेपी को सरकार बनाने का निमंत्रण और बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय भी दिया. लेकिन मामला संज्ञान में लाए जाने पर सुप्रीमकोर्ट ने वक्त घटा कर महज एक दिन कर दिया। बीजेपी सदन में बहुमत साबित करने में नाकाम रही. 80 सीटों वाली कांग्रेस के जेडीएस को समर्थन देने पर राज्यपाल को उन्हें बुलाना पड़ा। लिहाज़ा बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन कर भी अपने पद पर नहीं रह सके और बीजेपी को भी काफी बदनामी झेलनी पड़ी. अगर बीजेपी के दावे को सही मानें तो 9 विधायक उनके संपर्क में हैं। कुछ इस्तीफा दे कर तो कुछ सदन से गैर हाज़िर रहने पर सदन का कुल संख्याबल 214 तक आ सकता है. ऐसे में बीजेपी बहुमत साबित करने में कामयाब हो सकती है. इसके लिए कई फॉर्मूलों पर काम चल रहा है. ऐसे में विधायकों की खरीद-फरोख्त का मौसम लौट आय़ा है. अपने विधायकों को बचाने और दूसरे दल के विधायकों को खरीदने के लिए रिज़ॉर्ट पॉलिटिक्स तेज़ हो गई है. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि 2017 में गोवा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में जोड़तोड़ से सरकार बनाने की कोशिशों के आरोप लगे हैं. वही कर्नाटक में सुप्रीमकोर्ट ने बहुमत साबित करने का वक्त कम करने और बीजेपी की बहुमत साबित करने में नाकामी से भी बीजेपी के खिलाफ संदेश गया है. तब भी येदियुरप्पा की बेसब्री का नुकसान पार्टी को झेलना पड़ा.

येदियुरप्पा तीन बार अपना कार्यकाल पूरा करने में असफल रहे हैं. पिछली बार केवल ढाई दिन राजसुख भोग सके. हालांकि बीजेपी इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. लेकिन पार्टी को इस बात का लालच है कि अगर कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरती है और विधानसभा भंग कर दोबारा चुनाव कराए जाते हैं तो सबसे बड़ी पार्टी हो कर भी सरकार ना बना पाने के कारण उसे सहानुभूति मिलेगी और लोकसभा के साथ
विधानसभा चुनाव कराने पर दोनों जगह उसे फायदा मिलेगा.

दरसल कांग्रेस विरोधी दलों की सरकारें गिराने के लिए पिछले सत्तर सालों में बदनाम रही है. लेकिन शुचिता औऱ सामूहिक नेतृत्व की बात करने वाली बीजेपी से जोड़तोड़ की सरकारें बनाने की उम्मीद नहीं की जाती है. वहीं पिछले दो-तीन सालों में बीजेपी भी कांग्रेस की तर्ज पर तिकड़म करने से बाज़ नहीं आ रही है. भले ही कर्नाटक में बीजेपी को इसका फायदा मिले लेकिन ऐसी मुहिम को हवा दे कर बीजेपी को देश भर में नुकसान होने का अंदेशा है. बल्कि कांग्रेस विक्टिम कॉर्ड खेल कर इसका फायदा उठाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी.